दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम हो रहे है
मेलबर्न में शीला दीक्षित पूरे लाव लश्कर के साथ पँहुचीं,
एश्वर्या के लटके झटके दिखाए पूरी दुनिया को,
गुलज़ार साहब से "दिल्ली चलो" का गान लिखवाया,
सच बताएं हमें भी बहुत अच्छा लगा टीवी पर देख कर।
यहां टाईम्स ऑफ इंडिया ने चलो दिल्ली अभियान चलाया
दिल्ली को Walled City to World City बनाने के लिए।
जमीनी हकीकत यह है कि दिन में आठ से दस घंटे बिजली गायब रहती है और पानी की कमी इतनी कि कभी कभी नहाने का इंतजाम मुश्किल हो जाता है।
Wednesday, April 26, 2006
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7 comments:
आपकी जानकारी के लिये ये भी बता दें, कि मेलबार्न में हुए उस पूरे कार्यक्रम में भारतीय करदाताओं के २९ करोड रुपये खर्च हुए.
....बहुत ज्यादा तो नही है, अपनी 'इमेज' बनाने के लिय थोडा बहुत खर्च तो बेचार हर भारतीय करता है..
आगे सुनिये..
इन २९ करोड में से ९ करोड रुपये भारतीय अभिनेताओं और अभिनेत्रियों (सेफ अली खान, ऐश्वर्या राय इत्यादि) को 'मेहनताने' के रूप में दिया गया...
याने ऐश्वर्या का एक एक लटका और झटका १०-१० लाख का तो हुआ ही होगा..(अब इतनी मेहनत का इतना सा मेहनताना तो बनता ही है)..
ये बात दीगर है, कि जिन लोगों को कामनवेल्थ गेम्स में असली झटके दिखाने होंगे (मेरा मतलब है, खिलाडी और एथलीट)..उन बेचारों के "झटकों" की कोई कीमत नही, आये दिन खबर आती है, कि फलां एथलीट/ य खिलाडी(क्रिकेटॅ छोड कर)...चाय बेचने को मजबूर है, या हम्माली कर रहा है...वैसे झटके हम्माली के काम में भी खूब लगते हैं, पर उनकी कोई खास कीमत नही...
तो जनाब..इन्तजार कीजिये..अगले कामनवेल्थ गेम्स का...
पब्लिक का पैसा उड़ाने मे ये नौकरशाह, राजनेताओं से किसी भी मामले मे कम नही है। कोई इनसे पूछे, द्स मिनट के उस कार्यक्रम की क्या जरुरत थी? क्या इसके बिना लोग कामनवेल्थ गेम्स मे नही आते, क्या इन्डिया हान्डारूस जैसा देश है क्या, जिसे कोई नही जानता?
उसी पैसे को देश मे खेल प्रतिभाओं का विकास पर खर्चा जाता तो बेहतर होता।लेकिन क्या है कि बहती गंगा मे सबने चुल्लू चुल्लू भर पी लिया होगा, यही है "मेरा भारत महान"
राम जी की चिडिया, राम जी का खेत
चुग री चिडिया , भर भर पेट
असल में दिल्ली और भारत की एक सुंदर छवि दिखाने की कोशिश की गई मगर 'हम को मालूम है जन्नत की हकीकत ....'।
youwrite well aaina..keep it up
Thanks Divs
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